शिक्षक परीक्षा के प्रश्न पत्र से खून के आंसु रो रहे परीक्षार्थी

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शिक्षक परीक्षा के प्रश्न पत्र से खून के आंसु रो रहे परीक्षार्थी

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रविवार को हुए अंग्रेजी साहित्य एवं जीवविज्ञान के प्रश्नपत्रों में कोर्स के बाहर के प्रश्न पूछे जाने से परीक्षार्थी में बढ़ी मायुषी
छिंदवाड़ा। शिक्षक पात्रता परीक्षा 2019 एक बार फिर बेरोजगारों के लिए धोखा साबित हो रही है और विवादों में घिरती चली जा रही है। ऐसा इसिलिए है कि यह परीक्षा 2011 के बाद शिवराज सरकार ने कई तिथियां देने के बाद सितम्बर 2018 के दौरान निकाली थी और बेरोजगारों को साधने की कोशिश की थी, लेकिन चुनाव हो जाने के बाद जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार सत्ता में आई तो उन्होंने परीक्षा को एक महिने के लिए आगे बढ़ा दिया, कांग्रेस की सरकार पर लोकसभा चुनाव के पूर्व इस परीक्षा को कराने का दबाव बनता रहा, नतीजन सरकार ने एक माह बाद याने एक फरवरी से उच्च शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन शुरू कर दी तथा रविवार को आयोजित जीवविज्ञान और अंग्रेजी साहित्य के पेपर को देखकर अभ्यर्थियों के होश उड़ गए, जिस परीक्षा का इंतजार विगत 8 वर्षो से कर रहे थे, उन विद्यार्थियों के भविष्य के साथ किये गए इस भद्दे मजाक ने जहां एक ओर परीक्षार्थियों के मन में घोर निराशा भर दी। वहीं सरकार की मंशा निपटाओ अभियान भी समझ में आया। मामला यह था कि परीक्षा में शामिल परीक्षार्थियों का कहना था कि अंग्रेजी साहित्य का जो प्रश्नपत्र आया है, वह लगभग 50 प्रतिशत से भी अधिक प्रश्न आउट आॅफ कोर्स से पूछा गया है, जिनको समझ पाना इस स्तर के परीक्षार्थियों के लिए संभव नहीं था। हाई स्कूल शिक्षक पात्रता के लिए स्नातकोत्तर के प्रश्नों का समावेश किया जाना था, लेकिन कोर्स के बाहर के प्रश्न पूछने का औचित्य समझ में नहीं आया, सरकार को 10वीं 12वीं के लिए शिक्षको का चयन करना था, परंतु नेट और स्लेट स्तर के प्रश्नों का समावेश कर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि सरकार सिर्फ परीक्षा कराकर परीक्षार्थियों का मुंह बंद कराना चाहती है, परीक्षा देकर आए बहुत से परीक्षार्थियों से चर्चा के दौरान पता चला कि इस परीक्षा में सर्वाधिक नुकसान सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों को हुआ है जो कि न्युनतम क्वालिफाई नंबर 90 तक भी नहीं पहुंच पाए। जिले में एक-दो को छोड़ दे तो कोई भी परीक्षार्थी इस परीक्षा को सफल नहीं हो पाया है। वहीं एससी, एसटी वर्ग के विद्यार्थी भी इस कठिन पेपर को हल नहीं कर पाए। यदि सरकार को पेपर का स्तर इतना ऊंचा रखना था तो नेट, स्लेट की परीक्षा कराकर ही प्रोफेसर स्तर के प्रश्नपत्र और पाठयक्रम का जिक्र किया जाना था, इन एक माह में नई सरकार आने पर प्रश्नपत्र बदले गए साथ ही प्रश्नपत्र का स्तर इतना ऊपर कर दिया गया कि विद्यार्थी इसे समझ ही नहीं पाए और अपने-आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। यही हाल अन्य विषयों की परीक्षा का भी है। 3 फरवरी को हुए जीवविज्ञान के प्रश्नपत्र को पुन: कराए जाने की मांग विद्यार्थियों ने रखी है। अंग्रेजी साहित्य की सबसे ज्यादा रिक्तियां होने के बाद भी इस स्तर के पेपर से रिक्तयां खाली रह जाएगाी और योग्य उम्मीदवार निराशा के गर्त में चले जाएगें। परीक्षार्थियों ने बताया कि वे इस विषय को लेकर बेहद गंभीर है और अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। मंगलवार को मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम ज्ञापन देकर सरकार को अपनी मंशा से अवगत कराएंगे। ताकि शिक्षक पात्रता परीक्षा में योग्य उम्मीदवार के साथ कोई भेदभाव और अन्याय न हो सके।
माध्यमिक पात्रता का क्या होगा, सता रही चिंता
लाखों रूपए खर्च करके लाखों विद्यार्थियों ने डीएड और बीएड किया है, सिर्फ इस उम्मीद में कि शासन की भर्ती प्रक्रिया में शामिल होकर सरकार शिक्षक बनेंगे। परंतु प्रश्नपत्रों का स्तर देखकर अब माध्यमिक परीक्षा के परीक्षार्थी भयभीत है, उन्हें लग रहा है कि सरकार द्वारा किया गया यह कार्य कहीं सिर्फ दिखावा साबित तो नहीं हो जाएगा। मध्यप्रदेश के कई ऐसे जिले है, जहां सामान्य श्रेणी के या अन्य श्रेणियों के 8-10 परीक्षार्थी भी उत्तीर्ण नही हो पाए हैं। ऐसे में परीक्षार्थियों ने शासन से यह आग्रह किया है कि वे विषय की गंभीरता को समझते हुए आउट-आफ कोर्स के प्रश्नपत्रों के अंक प्रदान करें और साथ ही क्वालिफाई मार्क 90 अंक की बाध्यता को समाप्त कर मेरिट लिस्ट के आधार पर चयन करें। ज्ञापन देने वालों में विजय शर्मा, रेणुका गड़करी, मुकेश पटेल, मनीषा हेमल्टन, रिचा तिवारी, अजय चौरिया, निकिता रघुवंशी, श्रेया जुनेजा, आनंद सूर्यवंशी, अभय नारायण, मिसेस श्वेता, मानसी ठाकुर के अलावा ऐसे हजारों की संख्या में परीक्षार्थी अपनी मांगों को लेकर राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री एवं राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपेंगे।

रविवार को हुए अंग्रेजी साहित्य एवं जीवविज्ञान के प्रश्नपत्रों में कोर्स के बाहर के प्रश्न पूछे जाने से परीक्षार्थी में बढ़ी मायुषी
छिंदवाड़ा। शिक्षक पात्रता परीक्षा 2019 एक बार फिर बेरोजगारों के लिए धोखा साबित हो रही है और विवादों में घिरती चली जा रही है। ऐसा इसिलिए है कि यह परीक्षा 2011 के बाद शिवराज सरकार ने कई तिथियां देने के बाद सितम्बर 2018 के दौरान निकाली थी और बेरोजगारों को साधने की कोशिश की थी, लेकिन चुनाव हो जाने के बाद जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार सत्ता में आई तो उन्होंने परीक्षा को एक महिने के लिए आगे बढ़ा दिया, कांग्रेस की सरकार पर लोकसभा चुनाव के पूर्व इस परीक्षा को कराने का दबाव बनता रहा, नतीजन सरकार ने एक माह बाद याने एक फरवरी से उच्च शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन शुरू कर दी तथा रविवार को आयोजित जीवविज्ञान और अंग्रेजी साहित्य के पेपर को देखकर अभ्यर्थियों के होश उड़ गए, जिस परीक्षा का इंतजार विगत 8 वर्षो से कर रहे थे, उन विद्यार्थियों के भविष्य के साथ किये गए इस भद्दे मजाक ने जहां एक ओर परीक्षार्थियों के मन में घोर निराशा भर दी। वहीं सरकार की मंशा निपटाओ अभियान भी समझ में आया। मामला यह था कि परीक्षा में शामिल परीक्षार्थियों का कहना था कि अंग्रेजी साहित्य का जो प्रश्नपत्र आया है, वह लगभग 50 प्रतिशत से भी अधिक प्रश्न आउट आॅफ कोर्स से पूछा गया है, जिनको समझ पाना इस स्तर के परीक्षार्थियों के लिए संभव नहीं था। हाई स्कूल शिक्षक पात्रता के लिए स्नातकोत्तर के प्रश्नों का समावेश किया जाना था, लेकिन कोर्स के बाहर के प्रश्न पूछने का औचित्य समझ में नहीं आया, सरकार को 10वीं 12वीं के लिए शिक्षको का चयन करना था, परंतु नेट और स्लेट स्तर के प्रश्नों का समावेश कर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि सरकार सिर्फ परीक्षा कराकर परीक्षार्थियों का मुंह बंद कराना चाहती है, परीक्षा देकर आए बहुत से परीक्षार्थियों से चर्चा के दौरान पता चला कि इस परीक्षा में सर्वाधिक नुकसान सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों को हुआ है जो कि न्युनतम क्वालिफाई नंबर 90 तक भी नहीं पहुंच पाए। जिले में एक-दो को छोड़ दे तो कोई भी परीक्षार्थी इस परीक्षा को सफल नहीं हो पाया है। वहीं एससी, एसटी वर्ग के विद्यार्थी भी इस कठिन पेपर को हल नहीं कर पाए। यदि सरकार को पेपर का स्तर इतना ऊंचा रखना था तो नेट, स्लेट की परीक्षा कराकर ही प्रोफेसर स्तर के प्रश्नपत्र और पाठयक्रम का जिक्र किया जाना था, इन एक माह में नई सरकार आने पर प्रश्नपत्र बदले गए साथ ही प्रश्नपत्र का स्तर इतना ऊपर कर दिया गया कि विद्यार्थी इसे समझ ही नहीं पाए और अपने-आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। यही हाल अन्य विषयों की परीक्षा का भी है। 3 फरवरी को हुए जीवविज्ञान के प्रश्नपत्र को पुन: कराए जाने की मांग विद्यार्थियों ने रखी है। अंग्रेजी साहित्य की सबसे ज्यादा रिक्तियां होने के बाद भी इस स्तर के पेपर से रिक्तयां खाली रह जाएगाी और योग्य उम्मीदवार निराशा के गर्त में चले जाएगें। परीक्षार्थियों ने बताया कि वे इस विषय को लेकर बेहद गंभीर है और अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। मंगलवार को मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम ज्ञापन देकर सरकार को अपनी मंशा से अवगत कराएंगे। ताकि शिक्षक पात्रता परीक्षा में योग्य उम्मीदवार के साथ कोई भेदभाव और अन्याय न हो सके।
माध्यमिक पात्रता का क्या होगा, सता रही चिंता
लाखों रूपए खर्च करके लाखों विद्यार्थियों ने डीएड और बीएड किया है, सिर्फ इस उम्मीद में कि शासन की भर्ती प्रक्रिया में शामिल होकर सरकार शिक्षक बनेंगे। परंतु प्रश्नपत्रों का स्तर देखकर अब माध्यमिक परीक्षा के परीक्षार्थी भयभीत है, उन्हें लग रहा है कि सरकार द्वारा किया गया यह कार्य कहीं सिर्फ दिखावा साबित तो नहीं हो जाएगा। मध्यप्रदेश के कई ऐसे जिले है, जहां सामान्य श्रेणी के या अन्य श्रेणियों के 8-10 परीक्षार्थी भी उत्तीर्ण नही हो पाए हैं। ऐसे में परीक्षार्थियों ने शासन से यह आग्रह किया है कि वे विषय की गंभीरता को समझते हुए आउट-आफ कोर्स के प्रश्नपत्रों के अंक प्रदान करें और साथ ही क्वालिफाई मार्क 90 अंक की बाध्यता को समाप्त कर मेरिट लिस्ट के आधार पर चयन करें। ज्ञापन देने वालों में विजय शर्मा, रेणुका गड़करी, मुकेश पटेल, मनीषा हेमल्टन, रिचा तिवारी, अजय चौरिया, निकिता रघुवंशी, श्रेया जुनेजा, आनंद सूर्यवंशी, अभय नारायण, मिसेस श्वेता, मानसी ठाकुर के अलावा ऐसे हजारों की संख्या में परीक्षार्थी अपनी मांगों को लेकर राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री एवं राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपेंगे।.

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