विश्‍व मधुमेह दिवस आज देशभर में मधुमेह के सबसे कम मरीज मप्र में……

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  विश्‍व मधुमेह दिवस आज देशभर में मधुमेह के सबसे कम मरीज मप्र में..

छिन्‍दवाडा जिले मे मधुमेह के मरीजो की संख्‍या हर माह 100 से 200 बढ़ती ही जा रही है। इनमें से ज्‍यादातर ऐसे है जिन्‍हे  इसुंलिन की आवयश्‍ता होती है मधुमेह (डायबीटिज) के मामले में मध्यप्रदेश के लोग खुशनसीब हैं। यहां देशभर में सबसे कम मरीज पाए गए हैं। राष्ट्रीय पोषण संस्थान, हैदराबाद (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन-एनआईएन) द्वारा 16 राज्यों के शहरी इलाकों के महिला- पुरुषों पर किए गए सर्वे में यह परिणाम सामने आया। सर्वे के मुताबिक सबसे ज्यादा मरीज पुड्डूचेरी में हैं। उसके बाद दिल्ली का नंबर आता है। अधिकांश मरीज 60 से 70 वर्ष की उम्र के पाए गए जबकि सबसे कम 18 से 30 वर्ष की उम्र में।

देशभर में चल रहे प्रयोग

अच्छी खबर

नेशनल बोटेनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट एंड सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एरोमेटिक मेडिशिनल एरोमेटिक प्लांट एक आयुर्वेदिक दवा पर ट्रायल कर रही है। जिसका सफलता प्रतिशत 67 फीसदी बताया जा रहा है। इससे मरीजों पर आ रहे दवाइयों का खर्च भी कम होगा।

बुरी खबर

ब्लड शुगर नापने वाली घड़ी का काम रुका

इंदौर, बेंगलुरू, मुंबई सहित चार इंजीनियरिंग कॉलेजों में शुरू हुआ था प्रयोग

इंदौर सहित मुंबई, बेंगलुरू के इंजीनियरिंग कॉलेज में ब्लड शुगर (रक्त शर्करा) नापने वाली घड़ी का प्रोजेक्ट शुरू हुआ था। इसमें लेजर तकनीक के जरिए बगैर खून निकाले ही मरीज अपना ब्लड शुगर का स्तर जांच सकते थे। सरकार की अनुमति और फंड दोनों ही नहीं मिलने से यह प्रोजेक्ट फिलहाल रुक गया है।

एसजीएसआईटीएस के भौतिकी विभाग के प्रोफेसर और प्रोजेक्ट इंचार्ज प्रोफेसर एन्ड्रूज थॉमस का कहना है हमारे प्रोडक्ट के शोध में 3 से 5 साल का समय लग रहा था। सरकार को ग्रामीण अंचल तक सुविधा पहुंचाना थी, इसलिए इस प्रोजेक्ट को फिलहाल के लिए बंद करना पड़ा। तत्काल उपलब्ध होने की वजह से ग्लूकोमीटर (खून की एक बूंद से ब्लड शुगर का स्तर पता किया जाता है) प्रोजेक्ट को सरकार ने मान्यता दी। वर्तमान में बहुत से लोग इसे बना रहे हैं।

 

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