शव के मुख पर क्यों रखी जाती है चंदन की लकड़ी?

0
292
hindu dharm antimsanskar

 

अंत्येष्टि क्रिया

अंतिम संस्कार या अन्त्येष्टि क्रिया हिन्दुओं के प्रमुख संस्कारों में से एक है। संस्कार का तात्पर्य हिन्दुओं द्वारा जीवन के विभिन्न चरणों में किये जाने वाले धार्मिक कर्मकांड से है। यह हिंदू मान्यता के अनुसार सोलह संस्कारों में से एक संस्कार है।

आखिरी संस्कार

अंतिम संस्कार हिन्दुओं के पृथ्वी पर बिताये गए जीवन का आखिरी संस्कार होता है जिसे व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात मृतक के परिजनों द्वारा संपन्न किया जाता है। आम तौर पर हिंदुओं को मरने के बाद अग्नि की चिता पर जलाया जाता है, जिसमें शव को लकड़ी के ढेर पर रखकर पहले मृतात्मा को मुखाग्नि दी जाती है और तत्पश्चात उसके शरीर को अग्नि को समर्पित किया जाता है।

hindu dharm antimsanskar

जिंदगी की सच्चाई है मृत्यु

मौत जिंदगी की सच्चाई है, जो आया है उसे एक न एक दिन जाना ज़रूर है। हर धर्म की अपनी-अपनी प्रक्रिया है। हिन्दू धर्म में जैसा कि हमें ज्ञात है दाह संस्कार की प्रक्रिया की जाती है। मृत्यु के बाद वेदमंत्रों के उच्चारण द्वारा इस संस्कार को किया जाता है।

श्मशान कर्म क्या है?

मृत्यु के बाद होने वाले संस्कार को दाह-संस्कार कहते हैं। इसमें मृत्यु के बाद शव को विधिपूर्वक अग्नि को समर्पित किया जाता है। यह प्रत्येक हिंदू के लिए आवश्यक है। केवल संन्यासी-महात्माओं के लिए, आत्मा द्वारा शरीर छूट जाने पर भूमिसमाधि या जलसमाधि आदि देने का विधान है। कहीं-कहीं संन्यासी का भी दाह-संस्कार किया जाता है और उसमें कोई दोष नहीं माना जाता है।

मुख पर चंदन की लकड़ी

शास्त्रों में मनुष्य के जन्म से मृत्यु तक के लिए अलग-अलग 16 संस्कार बताए गए हैं। इन संस्कारों में सबसे आखिरी संस्कार है अंतिम संस्कार। अंतिम संस्कार किसी इंसान की मृत्यु के बाद शव को जलाने की क्रिया को कहते हैं। शव को जलाने से पूर्व भी कुछ खास परंपराओं का निर्वहन किया जाता है। इन्हीं परंपराओं में से एक परंपरा है शव के मुख पर चंदन की लकड़ी रखना।

क्या इसका वैज्ञानिक कारण है?

हिंदू धर्म में मृतक का दाह संस्कार करते समय उसके मुख पर चंदन रख कर जलाने की परंपरा है। यह परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। इस परंपरा के पीछे सिर्फ धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक कारण भी निहित हैं। परंपरा को निभाया जा रहा है, पर ज्यादातर लोगों को ये बात नहीं पता है कि इसका मुख्य कारण क्या है तथा इसको न निभाया जाए तो क्या होगा। हां, इतना अवश्य है कि मूलतः हर संस्कार का कारण अवश्य होता है।

स्वर्ग में चंदन

धार्मिक मान्यता के अनुसार मृतक के मुख पर चंदन की लकड़ी रख कर दाह संस्कार करने से उसकी आत्मा को शांति मिलती है तथा मृतक को स्वर्ग में भी चंदन की शीतलता प्राप्त होती है। क्यूंकि हिन्दू धर्म में स्वर्ग तथा नर्क की अवधारणा मानी जाती है, हर कोई चाहता है कि उसे मौत के बाद स्वर्ग ही प्राप्त हो, इसी क्रम में मृत्यु के पश्चात जब मृतक के रिश्तेदार दाह संस्कार करते हैं तब वह इस रिवाज़ को निश्चित अपनाते हैं।

बड़ा लाभकारी है चंदन

चंदन की लकड़ी अत्यंत शीतल मानी जाती है। उसकी शीतलता के कारण लोग चंदन को घिसकर मस्तक पर तिलक भी लगाते हैं, जिससे मस्तिष्क को ठंडक मिलती है। धार्मिक कृत्य में भी इसका प्रयोग किया जाता है। आम तौर पर अगर कोई गंगा स्नान के लिए भी जाए तो स्नान के बाद पंडा माथे पर चंदन ही लगाता है। पूजा पाठ का एक अभिन्न अंग है चंदन।

वैज्ञानिक कारण

जैसा कि हमें ज्ञात है कि ज्यादातर हिन्दू संस्कारो के पीछे वैज्ञानिक कारण अवश्य होता है। इस प्रथा के पीछे वैज्ञानिक कारण यह है कि मृतक का दाह संस्कार करते समय शरीर के मांस और हड्डियों के जलने से अत्यंत तीव्र दुर्गंध फैलती है। उस समय चंदन की लकड़ी भी जलाने से दुर्गंध का प्रभाव काफी कम हो जाता है। हालांकि दुर्गंध पूरी तरह समाप्त तो नहीं होती, लेकिन कुछ कम अवश्य हो जाती है।

दाह-संस्कार का कारण?

हिंदू धर्म में मृत्यु को जीवन का अंत नहीं माना गया है। मृत्यु होने पर यह माना जाता है कि यह वह समय है, जब आत्मा इस शरीर को छोड़कर पुनः किसी नये रूप में शरीर धारण करती है, या मोक्ष प्राप्ति की यात्रा आरंभ करती है। किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद मृत शरीर का दाह-संस्कार करने के पीछे यही कारण है। मृत शरीर से निकल कर आत्मा को मोक्ष के मार्ग पर गति प्रदान की जाती है। शास्त्रों में यह माना जाता है कि जब तक मृत शरीर का अंतिम संस्कार नहीं किया जाता है, तब तक उसे मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती है।

http://www.citytime.in

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here