शाह किसे देंगे मात!

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किसका कटेगा टिकट?

भाजपा की प्रदेश स्तरीय बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह द्वारा छिंदवाड़ा जिले के भाजपा विधायकों को संदेह के घेरे में लेने के बाद भाजपा की अंदरूनी राजनीति गरमा गई है। विधायक की टिकट का सपना देख रहे नेता और उनके समर्थक नये सिरे से टिकट के जुगाड़ में जुट गए है तो वहीं वर्तमान विधायकों को अपनी टिकट की चिंता सताने लगी है। अपने समर्थकों से वे भी फीडबैक जुटाने लग गए है। देखना है केन्द्रीय कमान संभाले शाह 2018 में किस विधायकों को मात देते हैं?
छिंदवाड़ा। भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व द्वारा पार्टी के विधायकों को संदेह की नजरों से देखे जाने के बाद जिला भाजपा में कहीं खुशी तो कहीं डर का माहौल दिखाई दे रहा है। कयास लगाए जा रहे है कि आखिर कौन है घर का भेदी? कौन है जो स्वयं के फायदे के लिए पार्टी को नुकसान पहुंचा रहा है?
वर्तमान में भाजपा के चार विधायक है जिनमें छिंदवाड़ा से चौ. चंद्रभानसिंह, चौरई से पं. रमेश दुबे, जामई से नत्थनशाह कवरेती और सौंसर से नाना मोहोड़। चारों नेताओं का इतिहास खंगालने की कोशिश राजनीतिक हलकों में की जा रही है। इतिहास में जिन भी नेताओं की पार्टी गाइडलाईन के खिलाफ जाकर काम करने की सबसे ज्यादा शिकायतें मिली है गाज उन्हीं पर गिरने की संभावना ज्यादा दिखाई दे रही है। केन्द्रीय नेतृत्व पार्टी को खून-पसीने से सींचने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की सलाह और शिकायतों को ज्यादा तवज्जों दे रहा है क्योंकि ईमानदार कार्यकर्ताओं को इस बात से ज्यादा तकलीफ है कि जब पार्टी को जरूरत थी तब गिनती के कार्यकर्ता थे और जब सत्ता आई तो लाभ लेने वाले बाहरी कार्यकर्ताओं ने कब्जा जमा लिया। ऐन-केन प्रकरेण सत्ता लाभ लेकर धन जुटाने वाले नेताओं को भी पार्टी दरकिनार करने का मन बना चुकी है। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में सभी विधानसभा सीटों पर भाजपा की जीत ही 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत का रास्ता खोलेगी इसी बात को ध्यान में रखते हुए केन्द्रीय नेतृत्व कोई कोर कसर नहीं छोडऩा चाह रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुसांगिक संगठनों के कार्यकर्ताओं से और नेताओं से खुफिया जानकारी जुटाई जा रही है ताकि वर्तमान विधायकों का सटीक फीडबैक तैयार किया जा सके। जामई विधायक की छवि को नि:संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है क्योंकि उनका राजनीतिक इतिहास स्वच्छ रहा है एवं उन्हें पहली बार टिकट मिला है।
इधर सौंसर में नाना मोहोड़ को नागपुर का आशीर्वाद मिला है लेकिन अवैध रेत खदानों से उत्खनन ने उनकी छवि को प्रभावित किया है। चौरई विधायक पं. रमेश दुबे और छिंदवाड़ा विधायक चौ. चंद्रभान सिंह की राजनीति प्रतिद्वंदिता के चलते दोनों नेताओं पर एक-दूसरे के क्षेत्र में दखंलदांजी से पार्टी को नुकसान होने की बात ज्यादा कहीं व सुनी जा रही है।
यूं भी जिला मुख्यालय में ही सबसे ज्यादा गुटबाजी चल रही है। आगे निकलने की होड़ में नेता अंदर ही अंदर एक दूसरे को नुकसान पहुंचा रहे है ये बात भी किसी से छिपी नहीं है। कुल मिलाकर छिंदवाड़ा और चौरई में परिवर्तन के कयास लगाए जा रहे है।

 

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