तुलस्यान दोषी या विभाग?

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उद्योग और स्कूल दोनों संचालित करने के लिए अनेक शासकीय नियम हो सकते है जिनका पालन किया किया गया होगा लेकिन दोनों एक ही स्थान पर संचालित करने की अनुमति कैसे मिल गई। निश्चित ही यह अनुमति देने वाले तत्कालिक अधिकारियों की लापरवाही और भ्रष्टाचार को उजागर करता है कि कैसे चंद रूपयों के आगे सरकारी नियमों में ढील देकर अनुमति प्रदान कर दी गई। न तो उद्योग विभाग के अधिकारियों ने यह देखा की पास ही स्कूल चल रहा है कभी कोई दुर्घटना हो जाएगी तो स्कूल में पढऩे वाले विद्यार्थियों का क्या होगा और न ही शिक्षा विभाग के वे अधिकारी जो अनुमति के पहले निरीक्षण करने आए थे उन्होंने देखा कि पास ही औद्योगिक गतिविधियां चल रही है जिससे कभी भी हादसा हो सकता है। सवाल है कि जब स्कूलों के पास पान ठेलों की दुकान लगाने की मनाही है तो इतना बड़ा औद्योगिक प्लांट कैसे चल रहा था ? दोनों विभागों के अधिकारियों द्वारा समय-समय पर की गई निरीक्षण की रस्मअदायगी भी इस हादसे ने उजागर की है कि कैसे संबंधों को निभाने के लिए नियमों की अनदेखी की जाती है।
पिछले सप्ताह नरसिंहपुर रोड पर चल रहे भारत भारती स्कूल में हुए हादसे ने अनेक प्रश्न आम जनमानस के मनमस्तिष्क पर उठ रहे है जिसका जवाब शायद ही मिल पाए । जिसे हादसा कहा जा रहा है दरअसल वह प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार की जुगलबंदी का नतीजा है। शहर के अंदर अनेक स्थानों पर अभी ऐसे ही हादसों का इंतजार है क्योंकि नियमों और कायदों को किनारे कर अनेकों मान्यता दी गई है।

कौन करेगा भरपाई?
क्यों भुगते माता-पिता

हादसे का शिकार हुए बच्चे और माता-पिता को जो शारीरिक, मानसिक और आर्थिक पीड़ा हुई उसका भुगतान कौन करेगा? एक ही स्थान पर स्कूल और औद्योगिक इकाई से कमाई कर रहा तुलस्यान परिवार या फिर नियमों को दरकिनार कर अनुमति देने वाले विभाग के बेपरवाह अधिकारी, या फिर जिला प्रशासन? ये कहां का न्याय है कि माता-पिता अपने खून-पसीने की कमाई से स्कूल प्रबंधन की फीस चुकाए और हादसे के बाद अपने बच्चों की जान बचाने के लिए पास के पैसे भी खर्च करे। जिस बात के लिए वे दोषी नहीं है उसकी सजा वे क्यों भुगते? हादसे के शिकार विद्यार्थियों की शारीरिक दक्षता भी प्रभावित हुई होगी साथ ही इस बात की भी संभावना है कि हादसे का शिकार बच्चे आगे किसी गंभीर बीमारी का शिकार हो सकते है? शाला प्रबंधन जब पढ़ाई के नाम पर मोटी फीस लेता है तो पालकों को भी हक है कि स्कूल टाईम में हुई दुर्घटना के लिए वो शाला प्रबंधन से खर्चा वसूल करे।

परासिया रोड पर शासकीय स्कूल परिसर के पास शहर का सबसे बड़ा कोल्ड स्टोरेज चल रहा है। क्या प्रशासन यहां सर्तकता अभी बरतेगा या फिर हादसे के बाद?

वीआईपी रोड पर भी स्कूल बिल्डिंग और कोल्ड स्टोरेज आमने-सामने है। क्या यहां भी हादसे का इंतजार उसके बाद कार्रवाई होगी?

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